डिजिटल डिटॉक्स इन हिंदी।

डिजिटल डिटॉक्स इन हिंदी। कैसे करें डिजिटल डिटॉक्स, ब्रेन रोट से बचना है, तो जल्द ही लेना होगा डिजिटल डिटॉक्स ।

डिजिटल डिटॉक्स इन हिंदी। कैसे करें डिजिटल डिटॉक्स, यदि आपको ब्रेन रोट से बचना है, तो डिजिटल डिटॉक्स ही एक ऐसा उपाय है, वो आपकी मदद कर सकता है। इस पोस्ट में आपको सभी सवालों के जवाब मिलने वाले हैं। बच्चा हो या बड़ा आजकल सभी फोन स्क्रीन के जाल में फंसे हुए हैं। इंसानों से ज्यादा फोन हमारे लिए जरूरी हो चुका है। इसका एक कारण यह भी है कि आजकल हमारे सारे काम स्मार्टफोन, लैपटॉप, टैबलेट और सोशल मीडिया से संबंधित हो रहे हैं। लैपटॉप टैबलेट का प्रयोग हम करियर से संबंधित कार्य करने में भी करते है, लेकिन इसके अलावा एंटरटेनमेंट भी ऐसा एक दूसरा कारण है। जिसके कारण हम फालतू में ही स्क्रीन्स पर अपना वक्त जाया करते हैं । जिसका प्रभाव हमारे शारीरिक, मानसिक और रोजमर्रा में करने वाले कामों पर भी पड़ता है। इसलिए डिजिटल डिटॉक्स हम सभी लोगों के लिए एक अनिवार्य उपाय है ।

डिजिटल डिटॉक्स क्या है? (What is Digital Detox?)

डिजिटल डिटॉक्स वह प्रक्रिया है । जिसमें आपको ब्रेन रोट जैसी मानसिक स्थिति को ठीक रखने के लिए, आपको सोशल मीडिया उपकरणों जैसे फोन, लैपटॉप, टीवी आदि से दूर रखा जाता है।
इसका मतलब यह कतई नहीं है, कि आपकी मानसिक स्थिति खराब है। इसका अर्थ यह है कि धीरे-धीरे फोन देखने की आदत से आपके मन में असहजता बढ़ती जाती है । जिसे दिमाग की सड़न या ब्रेन रोट भी कहा जाता है ।

जानते हैं कि ऐसे कौन से कारण है, जिसकी वजह से हम डिजिटल डिटॉक्स की बात कर रहे हैं ।

1. डोपामाइन बढ़ाने के लिए

हमारे अंदर हैप्पी हारमोंस होते हैं, जो की डोपामाइन के बढ़ने से हमें मिलता है। यह डोपामिन हमें किसी नई, आकर्षक चीज की तरफ बार-बार जाने पर मजबूर करता है। इसी वजह से आप बार-बार फोन की स्क्रीन, मैसेज, ई-मेल्स, यूट्यूब वीडियो, इंस्टा रील्स आदि स्क्रोल करते रहते हो। सुनने में यह बात बड़ी साधारण लगती है, लेकिन धीरे-धीरे हमें इन चीजों की लत लग जाती है ।

2. कुछ छूट जाने का डर “FOMO” (Fear Of Missing Out )

फोमो एक ऐसी टर्म है, जिसमें आपको यह महसूस होता है, कि दुनिया में जो चल रहा है। यदि आप नहीं जानेंगे, तो आप कहीं पीछे छूट जाएंगे। इसी कारण हमें ऐसा लगता है कि सोशल मीडिया में जो कुछ भी चल रहा हो, हमें वह सब पता होना चाहिए। इसलिए हम बिना किसी रोक-टोक के न्यूज़, एंटरटेनमेंट कॉमेडी आदि जैसी चीज देखते रहते हैं। जिससे हमें यह लगता है, कि हमारे ज्ञान में वृद्धि हो रही है ।

3. वर्तमान स्थिति से दूर जाने के लिए

ज्यादातर लोगों की वर्तमान स्थिति अच्छी नहीं होती। इसलिए वह अपनी खुशी सोशल मीडिया पर ढूंढने की कोशिश करते हैं। उन्हें लगता है यहां उन्हें हंसाने, रुलाने, मोटिवेट करने के लिए बहुत लोग हैं। इसलिए अपनी असल जिंदगी की मुसीबत और परेशानियों से भगाने के लिए भी, लोग सोशल मीडिया का रुख कर लेते हैं । और अपने कई घंटे वहीं बिताते हैं, और खुद को यह झूठा दिलासा देते हैं कि मैं एक दिन, सब ठीक कर दूंगा। पर वह एक दिन कभी आता ही नहीं।

4. डिजिटल डिटॉक्स क्यों जरूरी है? (Why is Digital Detox Necessary?)

डिजिटल डिटॉक्स हमारी मानसिक, शारीरिक और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर करने के लिए जरूरी है। अत्यधिक सोशल मीडिया के उपयोग से हमारे सोचने-समझने की क्षमता पर असर पड़ता है, और ब्रेन रोट की स्थिति पैदा हो जाती है। इसके अलावा लगातार एक जगह बैठने के कारण, शरीर में स्टीफनेस और गर्दन में दर्द की समस्या भी हो सकती है। डिजिटल डिटॉक्स की प्रक्रिया में हम सोशल मीडिया का उपयोग कम से कम करते हैं। जिससे कि हमारा पूरा ध्यान वर्तमान में होता है, और हम सभी कार्यों को सुचारू रूप से कर पाते हैं ।

डिजिटल डिटॉक्स इन हिंदी।

डिटॉक्स करने के उपाय

  • सुबह उठते ही फोन ना चलाएं।
  • सोशल मीडिया की सभी नोटिफिकेशन को ऑफ करके रखें।
  • हर आधे घंटे के लिए फोन पर रिमाइंडर लगाए, जिससे आपको पता लगे, कि आपको फोन चलाते हुए, कितनी देर हो चुकी है।
  • आप अपनी पसंद के अनुसार कंटेंट देख सकते हो, लेकिन आपको उसकी समय सीमा के बारे में पता होना चाहिए।
  • रात को सोते समय फोन को बेड पर नहीं रखना चाहिए, इसे किसी दूर जगह पर रखें, ताकि आपको बार-बार उसे उठाने में परेशानी हो ।
  • अपने आप को किसी एक्टिविटी जैसे पेंटिंग, गार्डनिंग, खाना बनाना, जर्नलिंग, वॉकिंग आदि में इंगेज रखना चाहिए। ताकि आपके पास इतना समय ही ना हो, कि आप फोन देखें।
  • यदि आप खुद को फोन देखने से नहीं रोक पा रहे हैं, तो उस वक्त आप मेडिटेशन कर सकते हैं। मेडिटेशन से आपका दिमाग शांत होगा।
  • आप एक साथ बैठकर अपने परिवार के साथ बातें शेयर कर सकते हैं। जिससे कि आप रील दुनिया से हटकर, रियल दुनिया पर वक्त बिता पाएंगे।

डिजिटल डिटॉक्स के लाभ (Amazing Benefits of Digital Detox)तनाव

1.तनाव में कमी

लगातार सोशल मीडिया के उपयोग से आप अपना मिलान दूसरों के साथ करने लगते हो, जिससे कि आपके मस्तिष्क में एक प्रतिरोध उत्पन्न होता है। जिससे तनाव जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। यदि हमारे पास इनफॉरमेशन का इतना ज्यादा फ्लो ना हो, तो आपके विचार सीमित रहेंगे। जिससे आपको वर्तमान स्थिति में रहने में मदद मिलेंगी, और आप सहजता के साथ अपना जीवन जी पाएंगे ।

2.उत्पादकता (Productivity) में वृद्धि

डिजिटल डिटॉक्स के जरिए आपके भीतर काम करने की क्षमता विकसित होगी,आपकी एकाग्रता शक्ति बढ़ेगी। आपके अंदर नए-नए विचार उत्पन्न होंगे, जिससे कि आप अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की तरफ और ध्यान दे पाएंगे।नई-नई स्किल डेवलप कर पाएंगे और कैरियर ग्रोथ में भी मदद मिलेगी।

3.नींद की गुणवत्ता में सुधार

फोन स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी, हमारे शरीर की सर्कैडियन लय यानी नींद-जागने का चक्र में हस्तक्षेप करती है। इसलिए यदि हम डिजिटल डिटॉक्स के उपाय को अपने जीवन में उतारते हैं। तो यह हमारी नींद की गुणवत्ता में भी सुधार लाता हैं ।

4.रिश्तो में मजबूती

डिजिटल डिटॉक्स मानवीय संबंधों को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता हैं। सोशल मीडिया की वजह से हम बहुत से लोगों के संपर्क में आ जाते हैं, केवल उनके संपर्क में ही नहीं आते, जो हमारा परिवार होता है । हम दिन-भर में घटने वाली घटनाओं को अपने परिवार के साथ साझा कर सकते हैं। जिससे कि हमारे तनाव में कमी और संबंधों में मजबूती आती है।

निष्कर्ष:-

डिजिटल डिटॉक्स आज हम सभी की जरूरत है। यदि आपको अपने जीवन से प्यार है तो, आपको इसके लिए एफर्ट जरूर करना चाहिए। यह आपके जीवन जीने की गुणवत्ता को सुधारेगा, और विकास करने के आपके दायरे को विकसित करेगा, आज से ही शुरू करें ।

हमने डिजिटल डिटॉक्स इन हिंदी, पोस्ट में यह बताने का प्रयास किया है कि डिजिटल डिटॉक्स कैसे किया जाता है । आशा है आपको इस प्रश्न का उत्तर अवश्य मिल गया होगा, इस पोस्ट को सिर्फ़ पढ़ें ही नहीं, बल्कि इसे अन्य लोगों के साथ शेयर भी करें, ताकि वह भी इन फायदो का लाभ उठा सके। इसी तरह की स्वास्थ्य संबंधित जानकारी प्राप्त करने के लिए jeevanmatters.com से जुड़े रहे ।

धन्यवाद !

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