नया काम शुरू करने में डर क्यों लगता है? असफलता के डर को हराएँ

क्या आप भी उन लोगो मे से जिन्हें नया काम शुरू करने में डर लगता हैं । यदि हाँ, तो आप सही पोस्ट पर आ चुके है जहाँ आप खुद के डर को समझेंगे, वही डर देखो, कैसे आपसे भागने लगता है । डरना कोई कमज़ोरी नही है बल्कि यह सार्वभौमिक मानवीय स्वभाव है, जो हमें हमारे कम्फर्ट ज़ोन से बाहर निकलने से रोकता है ।

इस ब्लॉग में, हम इस बात पर गहराई से नज़र डालेंगे कि हमे नया काम शुरू करने में डर क्यों लगता है? और इस डर को प्रबंधित कर, हम कैसे अपने लक्ष्यों की ओर मजबूती के साथ आगे बढ़ सकते हैं।

प्रस्तावना: डर – विकास का एक स्वाभाविक हिस्सा


शरीर खुद को बचाने की कोशिश करता है, किसी नई चीज को देखकर हम असहज महसूस करने लगते हैं । इसलिए आपको इस बात को समझना होगा कि कोई नया कौशल सीखना, एक नया रिश्ता बनाना ,या करियर में किसी चीज की शुरुआत करना अक्सर डर के साथ आयेगा । लेकिन यह डर हमेशा बुरा नहीं होता; यह एक अंतर्निहित सुरक्षा तंत्र है जो हमें संभावित खतरों से बचाता है। लेकिन अपने विकास के लिए ये डर अनिवार्य भी है । इस डर के पीछे के मनोविज्ञान को समझते है और इसे दूर करने की दिशा में अपने कदम आगे बढ़ाते है।

हमें नया काम करने से डर क्यों लगता है?

जानते है इसके मुख्य कारण: यह डर कई जटिल कारकों का परिणाम है जो हमारे मस्तिष्क की कार्यप्रणाली और हमारे सामाजिक परिवेश से जुड़े हैं।

असफलता का डर (The Fear of Failure)

असफलता का डर एक ऐसा डर है, जो हमें दिन-रात खाये जाता है । जिसमें बेचैनी, चिंताएं बढ़ती जाती है । यह डर पैसों की कमी और समय की बर्बादी के साथ सघन होता जाता हैं । इससे हमे ऐसा महसूस होता है कि हमारी आत्म-छवि और आत्म-मूल्य दोनों बर्बाद हो चुके है।
सामाजिक प्रभाव: समाज असफल व्यक्तियों को नकारात्मक दृष्टि से देखता है। सफलता को बहुत अधिक मूल्य देता है इसलिए हम अक्सर अस्वीकृति या दूसरों की दृष्टि में मूर्ख दिखने से डरते हैं।व्यक्तिगत प्रभाव: असफलता के कारण व्यक्ति के आत्म-सम्मान को ठेस पहुँचता है। उसे खुद की क्षमताओं पर शक होने लगता है और वह कोई नया काम नही कर पाता ।

आलोचना और निर्णय का डर (The Fear of Judgment and Criticism)

हम सामाजिक प्राणी हैं और दूसरों द्वारा स्वीकार किये जाने की चाहते हममें निहित होती हैं। इसलिए जब भी हम कुछ नया करते हैं, तो हम खुद को लोगों के जाँच के दायरे में रखते हैं।
मानसिकता: “लोग क्या कहेंगे?” यह सवाल हमे नया काम शुरू करने से रोकता है। हमें डर लगता है कि कही हम असफल हुए तो लोग मज़ाक उड़ाएँगे, आलोचना करेंगे, या हमें बेवकूफ समझेंगे। यह डर इतना गहरा होता है कि हम खुद पर शक करने लगते है और कुछ नया शुरू करते ही नही है।

नियंत्रण खोने का डर (The Fear of Losing Control)

जब हम अपने कम्फर्ट ज़ोन में होते हैं, तो हमें लगता है कि स्थिति हमारे नियंत्रण में है। लेकिन नया काम करना इस नियंत्रण की भावना को, हमसे दूर करने लगता है, और हम असहज हो जाते है । जो की आगे बढ़ने मे हमें बाधित करता है। जब हम एक ऐसा कार्य करते है जो की एक अपरिचित क्षेत्र में हो। जहाँ हम अभी तक विशेषज्ञ नहीं हैं। वहाँ नियंत्रण खोने की भावना असुरक्षा और चिंता उत्पन्न हो जाती है।

सुरक्षा और आराम की आवश्यकता (The Need for Security and Comfort)

हमारे मस्तिष्क का डिज़ाइन कुछ इस प्रकार हुआ कि वह ऊर्जा को सुरक्षित करे । नया सीखने और करने के लिए संज्ञानात्मक प्रयास की आवश्यकता पड़ती है, जो आरामदायक होने की तुलना में अधिक थकाऊ और उबाऊ होती है। हमारा कम्फर्ट ज़ोन वह स्थिति होती है, जहाँ हम कम से कम प्रयास करना चाहते है जिससे सुरक्षा का एहसास हो । इससे बाहर निकलना शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से तनावपूर्ण होता है।

डर को प्रबंधित करने और आगे बढ़ने की रणनीतियाँ

नया काम शुरू करने में डर क्यों लगता है? असफलता के डर को हराएँ


डर को पूरी तरह खत्म करना लगभग असंभव है, लेकिन इसे प्रबंधित करना और आगे बढ़ना संभव है।

डर को स्वीकार करें, उससे लड़ें नहीं

  • डर एक स्वाभाविक भावना है। इसे नज़रअंदाज़ करने या इससे लड़ने के बजाय, इसे स्वीकार करें।
  • खुद से कहें, “मुझे डर लग रहा है, और यह ठीक है।” स्वीकृति आपको इस भावना को तर्कसंगत बनाने और कार्रवाई करने में मदद करती है।

छोटे कदम उठाएँ (Baby Steps)

पूरे नए प्रोजेक्ट को एक साथ देखने से भारीपन महसूस हो सकता है। इसे छोटे, प्रबंधनीय कार्यों में विभाजित करें।
उदाहरण: यदि आप एक किताब लिखना चाहते हैं, तो पहला कदम 1000 शब्द लिखना नहीं, बल्कि पहले पैराग्राफ या एक रूपरेखा (outline) तैयार करना है। छोटे कदम गति बनाते हैं और असफलता के डर को कम करते हैं।

अनिश्चितता को विकास के अवसर के रूप में देखें

  • अपने दृष्टिकोण को बदलें। अनिश्चितता को खतरे के बजाय संभावना के रूप में देखें। हर नए प्रयास में सीखने और बढ़ने का अवसर होता है, भले ही परिणाम उम्मीद के मुताबिक न हों। विकास की मानसिकता (Growth Mindset) अपनाएँ, जहाँ असफलताएँ सीखने के बिंदु होती हैं, न कि अंतिम परिणाम।
  • सबसे बुरे संभावित परिणाम की कल्पना करें (और योजना बनाएँ) अक्सर हमारा डर वास्तविक परिणाम से कहीं ज़्यादा बुरा होता है। सबसे बुरे संभावित परिणाम के बारे में सोचें।

उदाहरण: “अगर मैं यह नया व्यवसाय शुरू करता हूँ और यह विफल हो जाता है, तो क्या होगा?” शायद आपको आर्थिक नुकसान होगा, लेकिन आप सुरक्षित रहेंगे और आपने मूल्यवान अनुभव प्राप्त किया होगा। एक बार जब आप सबसे बुरे परिदृश्य का सामना कर लेते हैं, तो आप इसके लिए एक आकस्मिक योजना (contingency plan) बना सकते हैं, जिससे नियंत्रण की भावना वापस आ जाएगी। पूर्णतावाद को छोड़ दें, पूर्णतावाद (perfectionism) अक्सर कार्रवाई का दुश्मन होता है। यह हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि जब तक सब कुछ सही नहीं हो जाता, तब तक हम शुरू नहीं कर सकते। याद रखें, पहला प्रयास कभी भी सही नहीं होगा। पहला प्रयास सीखने, समायोजित करने और बेहतर बनने के बारे में है।

समर्थन प्रणाली बनाएँ

अपने डर और योजनाओं को दोस्तों, परिवार या सलाहकारों के साथ साझा करें। एक मजबूत समर्थन प्रणाली आपको प्रोत्साहन और उद्देश्य प्रतिक्रिया दे सकती है। कभी-कभी, केवल अपने डर को ज़ोर से बोलना ही उन्हें कम शक्तिशाली बना देता है।

निष्कर्ष:

डर के बावजूद जीना ,नया काम करने का डर एक स्वाभाविक मानवीय भावना है। यह हमारी सुरक्षा की इच्छा से पैदा होता है। लेकिन सच्चा विकास और उपलब्धि कम्फर्ट ज़ोन के बाहर ही होती है। डर को अपनी प्रेरणा बनने दें, न कि अपनी बाधा। छोटे कदम उठाएँ, असफलता को सीखने के अवसर के रूप में स्वीकार करें, और अनिश्चितता को गले लगाएँ। याद रखें, महानतम उपलब्धियाँ अक्सर डर के बावजूद कार्रवाई करने का परिणाम होती हैं। पहला कदम उठाएँ—भले ही आपके पैर काँप रहे हों।

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